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राजनैतिक सियासत, यूपी वोट बैंक 17 फीसदी ब्राह्मणों पर डोरेदार रहे सभी दल: उत्तर प्रदेश में 6 ब्राह्मण बने मुख्यमंत्री.!!

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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 जिस दल को ब्राह्मणों का मिला साथ उसकी बनी सरकार

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 से पहले एक बार फिर सभी दलों की नजर 17 फीसदी ब्राह्मण मतदाताओं पर है। पिछले तीन विधानसभा चुनाव को देखें तो जिस पार्टी के सबसे ज्यादा ब्राह्मण विधायक जीते, यूपी में सरकार भी उसी दल की बनी। इसीलिए ब्राह्मण समुदाय को रिझाने के लिए बहुजन समाज पार्टी ने अयोध्या से ब्राह्मण सम्मेलन शुरू कर किया है। वहीं, समाजवादी पार्टी ने भी मंगल पांडेय की धरती बलिया से प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलन आयोजित करने जा रही है। सम्मेलनों के जरिए ब्राह्मणों के लिए किए गए कार्यों को भी गिनाया जाएगा। चर्चा है कि कांग्रेस भी अपने दिग्गज नेता प्रमोद तिवारी को सीएम कैंडिडेट घोषित कर मास्टर स्ट्रोक खेलने की तैयारी में है।


2017 के यूपी विधानसभा में कुल 90 ब्राह्मण विधायक बने, जिनमें से 58 विधायक बीजेपी के थे। 2012 के विस चुनाव में जब अखिलेश की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी जिसमें 45 विधायक ब्राह्मण थे। वहीं, 2007 में जब मायावती के काल में 41 ब्राह्मण विधायक थे। इस बार मायावती 100 ब्राह्मणों को टिकट देने जा रही हैं।


मंडल कमंडल की राजनीति लाई हाशिए पर


करीब 23 साल तक प्रदेश की सत्ता की कमान ब्राह्मण समुदाय के हाथ में रही, लेकिन मंडल और कमंडल की राजनीति ने उन्हें हाशिये पर धकेल दिया। कांग्रेस से छिटकने के बाद ब्राम्हण कभी सपा के साथ तो कभी बसपा और कभी बीजेपी के साथ गया।


बीजेपी से ‘कथित’ नाराजगी


मंत्रिमंडल में उचित और महत्वपूर्ण मंत्रालयों में प्रतिनिधित्व न होना, कथित एनकाउंटर्स में कई ब्राह्मणों का मारा जाना और तमाम सरकारी नियुक्तियों में भी ब्राह्मणों को नजरअंदाज किया जाने से ब्राह्मण नाराज हैं।


उत्तर प्रदेश में 6 ब्राह्मण मुख्यमंत्री बने


आजादी के बाद से 1989 तक यूपी की सियासत में ब्राह्मणों का वर्चस्व रहा। गोविंद वल्लभ पंत, सुचेता कृपलानी, कमलापति त्रिपाठी, हेमवती नंदन बहुगुणा, श्रीपति मिश्र और नारायण दत्त तिवारी सहित छह नेता मुख्यमंत्री बने। ये सभी कांग्रेस से थे। इनमें नारायण दत्त तिवारी तीन बार यूपी के सीएम रहे


राज्य में ब्राह्मण मतदाता


यूपी में करीब 17 फीसदी तक ब्राह्मण मतदाता हैं। हालांकि कुछ जिले ऐसे भी हैं जहां इनकी संख्या करीब 25 फीसद है। बुंदेलखंड के झांसी, महोबा, हमीरपुर, बांदा, जालौन व अमेठी, पीलीभीत, इटावा, फतेहपुर, कानपुर, आजमगढ़, औरैया पश्चिमी यूपी के हाथरस, बुलंदशहर, मेरठ, अलीगढ़, पूर्वांचल व लखनऊ के आसपास अनेक जिलों में ब्राह्मण मतदाता निर्णायक स्थिति में हैं।


उत्तर प्रदेश में दमदार और ताकतवर ब्राह्मण नेता


भाजपा…… ह्रदयनारायण दीक्षित, डॉ. दिनेश शर्मा, सतीश द्विवेदी, श्रीकांत शर्मा, रीता बहुगुणा जोशी, महेंद्र नाथ पांडेय, ब्रजेश पाठक
समाजवादी पार्टी….. हरिशंकर तिवारी, माता प्रसाद पांडेय, विनय तिवारी, अभिषेक मिश्रा, मनोज पांडे, तेज नारायण पांडेय ‘पवन’
बहुजन समाज पार्टी…… सतीश चंद्र मिश्र, नकुल दुबे
कांग्रेस…… प्रमोद तिवारी, आराधना शुक्ला l
उत्तर प्रदेश राजनीतिक सियासत में जिसको मिला साथ उसी ने केंद्र पर राज किया l

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